ट्रेन का आरक्षित डिब्बा

15 अप्रैल, 2019 सोमवार की वही अलसाई सुबह और 6:40 की इंदौर-भोपाल इंटरसिटी। असंख्य बस्ता टांगें लोग और उनके साथ मैं। जैसा कि इस शृंखला के पूर्व लेखों में आप जान चुके हैं कि ट्रेन हो, लोगों का जमावड़ा हो और कोई मज़ेदार क़िस्सा न हो ऐसा सम्भव नहीं। इससे पहले मैं आपको अपनी सहूलियत […]

Read More ट्रेन का आरक्षित डिब्बा

ट्रेन का जनरल डिब्बा -3

रात के कोई 11 बजे होंगे। उज्जैन स्टेशन पर खड़ा मैं अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। आज फिर मुझे एक रात में एक शहर से दूसरे शहर पहुंचना था, जो कि मेरे सबसे पसंदीदा कार्यों में से एक है। धड़धड़ाती हुई एक ट्रेन प्लेटफॉर्म आकर रुकने लगी। इंजन के बाद लगे दो डिब्बों […]

Read More ट्रेन का जनरल डिब्बा -3

नक़ाबपोश

उसने हाथ को मज़बूती से थाम रखा था। थाम क्या, पकड़ रखा था। देखने में प्रतीत होता था कि यह सब लड़की की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ था। लड़की के साथ अधेड़ उम्र का व्यक्ति बैठा था। उसके गोल चेहरे पर गड्ढे थे, सिर के बाल बिखर रहे थे, मूंछे साफ थी लेकिन दाढ़ी बढ़ी हुई […]

Read More नक़ाबपोश

ट्रेन का जनरल डिब्बा-2

1-2 मार्च 2018 के दरम्यानी रात समय- 3:15 AM स्थान- मथुरा के रास्ते सवाई माधोपुर से पहले कहीं पिछली ट्रेन में तो इतनी सीटें खाली थीं कि मन कर रहा था हर सीट पर थोड़ी-थोड़ी देर लेट कर देखूँ कि कौन-सी सीट ज़्यादा आरामदायक है। लेकिन यहां माहौल कुछ अलग है। मथुरा पहुंचने के लिए […]

Read More ट्रेन का जनरल डिब्बा-2

ट्रेन का जनरल डिब्बा

1 मार्च 2018, रात करीब 1 बजे, स्थान : इंदौर से मथुरा के रास्ते में कोटा से पहले ट्रेन का जनरल डिब्बा आज पूर्णिमा की रात है। चाँद अपने शबाब पर है इसलिए इस गहन अंधकार में भी बाहर का हर दृश्य साफ़ नज़र आ रहा है। कम से कम इतना साफ़ कि पेड़, पहाड़, […]

Read More ट्रेन का जनरल डिब्बा

‘लल्लूलाल अमर रहे’

‘सोच रहा हूँ मैं भी राजनीति में उतर ही जाऊं’ निहायती निठल्ले कल्लू ने मुफ्त की तम्बाकू रगड़ते हुए कहा। ‘भाई राजनीति में हमारा-तुम्हारा क्या काम’ उसके दोस्त बल्लू ने पूछा। ‘ अरे तुम तो ठहरे बुद्धू के बुद्धू, राजनीति हम नहीं करेंगे तो क्या तुम्हारे चचा जान करेंगे।’ कल्लू तम्बाकू फांक कर बोला। ‘आज […]

Read More ‘लल्लूलाल अमर रहे’

भूख़

(यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है।इसमें दर्शाये गए पात्र, घटना,एवं स्थान का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नही है।यदि ऐसा होता है तो केवल यह मात्र एक संयोग है। ) ‘आपको कितना चाहिए।’ एक दवा कंपनी का एमडी बोला। ’50 लाख।’ सूट-बूट पहने दूसरा व्यक्ति अपनी आरामदायक कुर्सी पर पीछे टिककर बोला। […]

Read More भूख़